धर्मनिरपेक्षता / सेक्युलरिज्म

पूरी पोस्ट पढ़ें बिना किसी तर्क पे ना पहुंचे !

 इस पोस्ट में मैंने धर्मनिरपेक्षता / सेक्युलरिज्म के बारेमे चर्चा की है ।

सबसे पहले हम धर्मनिरपेक्षता का सही मतलब जानेंगे , उसके बाद हिन्दुधर्म और हिन्दू लोग धर्मनिरपेक्षता पे कहा है ये देखेंगे और अंत में भारत में धर्मनिरपेक्षता की स्थिती का अवलोकन करेंगे ।

अ) धर्मनिरपेक्षता के बारेमे संक्षेप मे कहा जा सकता है के - राजव्यवस्था / कानून / न्याय प्रणाली इ सब का किसी भी धर्म / धार्मिक मान्यता / धर्मग्रन्थ / धर्मगुरु इ से सम्पूर्ण परहेज / अलगाव / स्वातंत्र्य का मतलब है - धर्मनिरपेक्षता!!!

{ Secularism is the principle of separation of government institutions, and the persons mandated to represent the State, from religious institutions and religious dignitaries....In another sense, it refers to the view that human activities and decisions, especially political ones, should be unbiased by religious influence : http://en.wikipedia.org/wiki/Secularism }

ये बात अछी तरीके से समझ लें के धर्मनिरपेक्षता और सर्वधर्मसमभाव के मतलब एक-दुसरे से सम्पूर्ण विपरीत है !!!!!!
धर्मनिरपेक्ष विचार का मतलब है नीति / बर्ताव / व्यवहार में धर्म का कोई भी महत्व ना होना । बल्कि सर्वधर्मसमभाव का मतलब है - सभी धर्म को समान समझ के सभी को मान्यता देना !

मतलब - अगर मै खुदको धर्मनिरपेक्ष कहलाता हूँ - तो उसका अर्थ है - मै मेरा आचरण सामने वाले व्यक्ति के धर्म/जात इ से स्वतंत्र रखके उसके स्वभाव और बर्ताव पे निर्भर रखता हूँ -
और अगर मै हमारे देश ने धर्मनिरपेक्ष याने सेक्युलर रहना चाहिए ऐसी मनशा रखता हूँ - तो इसका मतलब है के मै - "हमारे देश के न्याय प्रणाली ने, कायदे-कानून ने भी नागरिक के या अपराधी के धर्म से कोई वास्ता ना रख के परिस्थिति या अपराध के स्वरुप के अनुसार नियम या शिक्षा करनी चाहिए" - इस बात में विश्वास रखता हूँ ।

सबसे महत्वपूर्ण बात - धर्मनिरपेक्षता का मतलब "खुदके धर्म का पालन ना करना" ऐसा नहीं है ! इसका वास्ता सिर्फ और सिर्फ आपके या सरकार के दूसरों के प्रति / नागरिकों के प्रति बर्ताव से है ।

मतलब - धर्मनिरपेक्षता किसी भी धर्म के अस्तित्व को अनदेखा करके बर्ताव करने का रास्ता है - नाकि किसी के तुष्टिकरण का । सामने वाला मुसलमान अगर मेरे साथ अच्छा रहा तो मै भी प्यार से रहूँगा - लेकिन अगर उसने कोई ऐसी-वैसी हरकत की तो वो हिंदू हो या मुसलमान - मै या देश का क़ानून उसे माफ़ नहीं करेंगे --- ये है सच्ची धर्मनिरपेक्षता !

ब) अब सवाल ये उठता है की हमारा हिन्दुधर्म और हिन्दू लोग धर्मनिरपेक्षता पे कहा है ?
अगर आप उपर दिया हुआ धर्मनिरपेक्षता का सही अर्थ देखेंगे जो समझ जाएंगे के पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा धर्मनिरपेक्ष लोग हिन्दू है और सभी धर्मोंमे सबसे ज्यादा धर्मनिरपेक्षता की सीख देने वाला धर्म हमारा हिन्दू धर्म है ।
इसका सबसे बड़ा सबूत है हमारे देश में सभी धर्मोंका पनपना । ना हमारे धर्म गुरुओं ने कभी दुसरे धर्मोंके लोगोंकी बेवजह बेरहम ह्त्या करने का उपदेश दिया, ना हमारे किसीभी धर्म ग्रंथोने ऐसा घिनौना उपदेश दिया - ना किसी राजा ने धर्म के नाम पे कतलेआम किया । इसपे बहुत ही दुखद अपवाद है हमारी जाती-व्यवस्था का । लेकिन सौभाग्य की बात है के हमारे देश में आंबेडकर , सावरकर जैसे लोग हुए है जिन्होंने अस्पृश्यता , उच - नीच को कम करने का काम किया ।

क) अब हम भारत में धर्मनिरपेक्षता की स्थिती का अवलोकन करते है ।

भारत में धर्मनिरपेक्षताकी स्थिती पे जितना रोया जाय उतना कम है । संक्षेप में कहूँ तो - भारत में सच्ची धर्मनिरपेक्षता शून्य के बराबर है । यूनीफोर्म सिव्हिल कोड से लेके धार्मिक न्यासों के प्रति सरकार के रवैये तक , बिकी हुई मिडिया और पत्रकारों से लेके बीके हुए इकोनोमिस्ट, स्तंभ लेखकों तक - सभी के सभी लोगोने धर्मनिरपेक्षता की अमर्याद चिर-फाड़ की है ।

आज हमारे देश में धर्मनिरपेक्ष होना - खुदको सेक्युलर कहलाना  - मतलब एक भद्दा मज़ाक या घिनौनी गाली बन चुकी है । जो धर्मनिरपेक्षता हमें "अपराधी का धर्म देखे बिना उसे उसके अपराध नुसार सज़ा होनी चाहिए" ऐसा सबक सिखाती है - उसी धर्मनिरपेक्षता के नाम का घिनौना इस्तमाल करके आतंकियोंको, धार्मिक कट्टरवादियोंको बचाया जाता है ।

मुंबई के आझाद मैदान पे आतंक होता है, अवैध बंगलादेशी घुसपैठ हमारे देशमे घुसकर हमारे ही लोगोंको मारते है, कश्मीर में पाकिस्तान के झंडे लहराते है और हमारे जवानोंपे पत्थर बरसते है --- लेकिन हमारे देशद्रोही नेता सौदी अरेबिया से आने वाले पैसो के खातिर धर्मनिरपेक्षता का बुरखा पहनके मीठी बोली गाते रहते है । ये समझ लो की इसे धर्मनिरपेक्षता नहीं - पैसोंके लिए आत्मा बेचना कहते है ।

खेदजनक बात ये है, की धर्मनिरपेक्षता का सही मतलब हमारे नौजवान देशभक्तोंको कोई नहीं बताता - और इस वजह से ये देशभक्त "सच्चे धर्मनिरपेक्ष" और "झूठे धर्मनिरपेक्ष" { Secularऔर Pseudo-Secular } लोगों में फर्क नहीं कर पाते --- और परिणाम ? --- "अच्छे", "देशभक्त" नागरीकोंमे दरार !!!! - ये दरार कोंग्रेस और बीके हुए मिडिया / पत्रकार इ की सबसे बड़ी जीत है और सच्चे देशभक्त विचारवंतोंकी शर्मनाक हार ।

ये पोस्ट लिखने का कारण यही दरार है ।

Pseudo-Secular लोगोंसे देश को बचाने के लिए हमें ये दरार मिटानी होगी !
हम सब को सोच समझ के "एकजुट" होकर देश को बरबादी से बचाना होगा ।
- तभी जाकर भारत कश्मीर से कन्याकुमारी तक आबाद और खुशहाल होगा ।

वन्दे मातरम !

4 comments:

  1. bahoot khoob.. sach likha hai... shabdo ka talmail kafi shandar hai..

    ReplyDelete
  2. साधु लोग जब भगवानके नाम अधर्म आचरण करने लगते है तब भगवान आते है सीधा मार्ग बनाके मनुष्यका अपने तक फिर जाके सत्व हृदयस्थ् हो जाते है। जो भगवान ने नकलंकी अवतार ले लिया है। नकलंकी अवतारका सीधा अर्थ है हरेक मनुष्यमे ही क्या सभी जगह दर्शन हो रहा है। चाहे जीस रुपमे देखो न देखो बस अपने आपमे देख शक्ते हो देख लो बस हो गया दर्शन।

    ReplyDelete
  3. सहमत हू.
    जो आज़ाद मैदान के वाकिये या बंगलादेशीयों कि भारत मे घुसपैठ को नजरअंदाज करते है वो लोग है ही psuedo - secular. वो निंदा के पात्र है.
    लेकिन क्रिपया इस बात पर भी ध्यान दें कि जिस तर्क पर हमारे पिछड़े लोगों के लिये आरक्षण है उसी तर्क पर मुस्लिम समाज को मुख्य धारा मे लाने के लिये उठाये जाने वाले कदम इस pseudo - secularism की कक्षा से बाहर होने चाहिये.
    शाह बानो केस pseudo - secularism का उत्तम उदाहरण है जिसमे राजीव गांधी सरकार ने केवल वोट बँक के लिये एक सुप्रीम कोर्ट के एक अहम कल्याणकारी फैसले के खिलाफ कानून लाया था.
    और यह ना समझे कि हर pseudo - secular नेता या संघटन सौदी पैसा इस्तेमाल करता है. उनके इस कार्य का कारण भय भी है, उनको लगता है कि मुस्लिम खिलाफ हो गये तो शांती शायद ना रह पाये या दंगे हो या वोट बँक चला जाये या फिर इंदिरा गांधी काल से आयी कॉंग्रेस कि बीमार मुस्लिम पॉलिसी जो उनको लगता है कि सौ टका सही है और इससे वो लोग देश का ही काम कर रहे है जो की सरासर गलत है.
    उन pseudo - seculars के ऐसे बर्ताव का कारण एक और है जो सुनने मे अजीब लगेगा लेकिन सत्य है,और वह है विरोधी पार्टियों और संघटनोंका pseudo - nationalism! जिसमे केवल हम हि देशभक्त है,हम हि देश के मुख्य लोग है बाकि धर्म तो किरायेदार है ऐसी भावना बाकि लोगों में देनेवाले, कुछ चीज़ें औरों पर थोपनेवाले लोग शामिल है. इनको भी लगता है की ये राष्ट्र का कार्य कर रहे है जो उतनेहि गलत है जितने pseudo - seculars.
    हमे इन दोनो विचार धाराऔ का एकतरह से ही खंडन करना पड़ेगा.

    ReplyDelete
  4. Excellent you have made it clear, lets words converted to action, country converted to real dwmocracy with real secularism.

    ReplyDelete